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Astrology भारतीय ज्योतिष
     भारतीय ज्योतिष-शास्त्र की एक प्रमुख विशेषता है, कि यह प्रत्यक्ष शास्त्र है । सौर मण्डलीय ग्रहों की गति, स्थिति, उदय, अस्त, मार्गत्व, वक्रत्व, ग्रहण, एवं चन्द्रकलाओं की ह्रास-वृद्धि आदि कुछ ऐसी धटनायें है, जो हजारों-हजारों वर्षो से इसकी प्रत्यक्षता की गवाही दे रही है ।

     ज्योतिष-शास्त्र में प्रत्यक्षता का अर्थ होता है - “गणितागत परिणाम का ज्यों का त्यों दिखलाई देना” । उदाहरणार्थ जिस समय गणित से पूर्णिमा आए और उस समय चन्द्रमा का परिपूर्ण बिम्ब दिखलाई दे अथवा जिस समय सूर्य या चन्द्रमा का ग्रहण पड़े अथवा गणित से ग्रहों के उदयास्त का जो समय बतलाया जाए, उसी समय ग्रहों का उदयास्त हो, इस प्रकार के गणितागत परिणामों का यथावत् घटित होना प्रत्यक्षता कही जाती है ।

     ‘प्रत्यक्षं ज्योतिषं शास्त्रम्’की उद्घोषणा करने वाले वशिष्ठ एवं पाराशर प्रभृति महर्षियों ने इस प्रकार के सत्यों एवं सिद्वांतो को दो प्रकारों से ज्ञात किया था । १ - अन्तर्दृष्टि एवं, २ – पर्यवेक्षण । अन्तर्दृष्टि या दिव्यदृष्टि एक ऐसी वैयक्तिक क्षमता है जिसके द्वारा विचार - तरंगों में आन्दोलित तथ्यो को यथावत् आत्मसात् किया जा सकता है। तथ्य एवं सत्य दोनो को जानने की यह एक संयुक्तिक विधि है । क्योंकि यह विचारणीय पदार्थ के विहित गुण-दोषों का ही विवेचन नहीं करती, वरन् यह सर्वथा उदासीन या तटस्थ रहकर उसके सम्पूर्ण स्वरूप का यथावत् अवलोकन भी करती है । इसलिए अन्तर्दृष्टि अभिज्ञान में सदैव एक मौलिक प्रकार की निश्चिन्तता एवं विश्वसनीयता पाई जाती है ।

     हमारे महर्षियों ने इसके साथ-साथ पर्यवेक्षण का सतत उपयोग किया था । वे अकेली-अकेली एवं सामूहिक घटनाओं को बार-बार घटित होने वाली ग्रहों की गतिविधियों के प्रकाश में ध्यानपूर्वक देखते थे और ग्रहों की गतिविधियों की आवृत्ति के साथ-साथ उनकी जनसमुदाय पर पड़ने वाली शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रियाओं का अवलोकन करते थे । इस प्रकार सैंकड़ो वर्षों के पर्यवेक्षण ने क्रान्तिद्रष्टा ऋषियों को तत्काल जन्म लेने वाले एवं जीवित मानवों पर एक सुविशेष प्रकार का प्रभाव पड़ता है ।

     इस प्रकार की अन्तर्दृष्टि एवं पर्यवेक्षण की विधियों में ग्रह- नक्षत्रों की समस्त गतिविधियों एवं उनके मानव जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का एकत्र संकलित स्वरूप भारतीय ज्योतिषशास्त्र हैं । यदि संक्षेप में कहा जाए तो यह शास्त्र उन सत्यों एवं सिद्धांतो का ज्ञानकोष है - जिनके द्वारा ग्रह-नक्षत्रों की समस्त गतिविधियों एवं उनके समस्त परिणामों को जाना जा सकता है ।

     भारतीय ज्योतिष-शास्त्र के मनीषियों की यह सर्वसम्मत मान्यता है, कि जीवन में घटित होने वाली समस्त घटनायें ग्रह-नक्षत्रों की गतिविघियों के साथ सापेक्षता रखती हैं । ग्रहों की गति एवं स्थिति को काल कहते हैं । यह शास्त्र ग्रहों की गतिविधि अर्थात् काल तथा जीवन में घटित होने वाली घटना अर्थात् उसका परिणाम इन दोनों के बारे में सांगोपांग विवेचन करता है, अतः यह कालविज्ञान कहलाता है ।

     जन्मपत्रिका निर्माण एवं कुण्डली मिलान, गृह निर्माण वास्तु पूजन दिशा निर्णय प्राचीन वैदिक शास्त्रोक्त से किया जाता है ।